श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  3.33.90 
शत्रुहस्तगतां राजन् कथंस्विन्नाहरेर्महीम्।
इह यत्नमुपाहृत्य बलेन महतान्वित:॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपके पास तो विशाल सेना है, आप यहाँ पूरे प्रयत्न से युद्ध करके शत्रुओं के हाथ में पड़ी हुई पृथ्वी को उनसे क्यों नहीं छीन लेते?॥90॥
 
"O King! You have a huge army, why don't you fight here with full effort and take back the earth which is in the hands of the enemies from them?"॥ 90॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि भीमवाक्ये त्रयस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें भीमवाक्यविषयक तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)