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mahabharat 3.33.9: 'भरतकुलभूषण! आपके शासन में अपने को वश में रखकर आज हम अपने मित्रों को दुःखी और शत्रुओं को सुखी कर रहे हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.33.9 
कर्शयाम: स्वमित्राणि नन्दयामश्च शात्रवान्।
आत्मानं भवतां शास्त्रैर्नियम्य भरतर्षभ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'भरतकुलभूषण! आपके शासन में अपने को वश में रखकर आज हम अपने मित्रों को दुःखी और शत्रुओं को सुखी कर रहे हैं॥9॥
 
'Bharatkulbhushan! By keeping ourselves under control under your rule, today we are making our friends sad and our enemies happy.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)