श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  3.33.82 
इति लोके निर्वचनं पुरश्चरति भारत।
अपि चैता: स्त्रियो बाला: स्वाध्यायमधिकुर्वते॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
'भारत! यह उपर्युक्त सत्य उक्ति संसार में बहुत समय से प्रचलित है। यहाँ तक कि स्त्रियाँ और बच्चे भी इसे नित्य पाठ की तरह दोहराते रहते हैं। 82.
 
'Bharat! This above mentioned true proverb has been prevalent in the world for a long time. Even women and children keep repeating it like a daily recitation. 82.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)