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mahabharat 3.33.77: 'वह कहता है कि तुमने कभी भी मोह, दरिद्रता, लोभ, भय, कामना या धन के लिए थोड़ा सा भी झूठ नहीं बोला है।   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  3.33.77 
यन्न मोहान्न कार्पण्यान्न लोभान्न भयादपि।
अनृतं किंचिदुक्तं ते न कामान्नार्थकारणात्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
'वह कहता है कि तुमने कभी भी मोह, दरिद्रता, लोभ, भय, कामना या धन के लिए थोड़ा सा भी झूठ नहीं बोला है।
 
‘He says that you have never spoken even the slightest lie, either out of attachment, poverty, greed, fear, desire or for money.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)