Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.33.74: 'तुम पर आई इस असम्भव विपत्ति को देखकर लोग निश्चयपूर्वक यह मानने लगे हैं कि सूर्य का तेज छीना जा सकता है और चन्द्रमा का प्रकाश भी छीना जा सकता है। | mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'तुम पर आई इस असम्भव विपत्ति को देखकर लोग निश्चयपूर्वक यह मानने लगे हैं कि सूर्य का तेज छीना जा सकता है और चन्द्रमा का प्रकाश भी छीना जा सकता है।
'Seeing this impossible calamity which has befallen you, people have begun to believe with certainty that the radiance of the Sun can be taken away and the light of the Moon can be taken away. 74.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥