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mahabharat 3.33.71: राजा ! जैसे सूर्य भगवान पृथ्वी का रस सोखते हैं और अपनी किरणों से वर्षा करके सबकी रक्षा करते हैं, वैसे ही आप भी प्रजा से कर वसूल करके उनकी रक्षा करके सूर्य के समान बनिए ॥ 71॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  3.33.71 
यथा राजन् प्रजा: सर्वा: सूर्य: पाति गभस्तिभि:।
अत्ति चैव तथैव त्वं सदृश: सवितुर्भव॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
राजा ! जैसे सूर्य भगवान पृथ्वी का रस सोखते हैं और अपनी किरणों से वर्षा करके सबकी रक्षा करते हैं, वैसे ही आप भी प्रजा से कर वसूल करके उनकी रक्षा करके सूर्य के समान बनिए ॥ 71॥
 
King! Just as the Sun God absorbs the juice of the earth and protects them all by raining with his rays, you too should become like the Sun by collecting taxes from the people and protecting them. ॥ 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)