vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध
»
श्लोक 69
श्लोक
3.33.69
सत्त्वेन कुरुते युद्धं राजन् सुबलवानपि।
नोद्यमेन न होत्राभि: सर्वा: स्वीकुरुते प्रजा:॥ ६९॥
अनुवाद
'राजन्! बहुत बलवान पुरुष भी अपने बल से ही युद्ध करता है; वह अन्य किसी प्रयत्न या स्तुति से समस्त प्रजा को अपने वश में नहीं कर सकता ॥69॥
'King! Even a very strong man fights with his own strength; he does not bring all the people under his control through any other effort or praise. 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×