vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध
»
श्लोक 62
श्लोक
3.33.62
न ह्यर्जुनसम: कश्चिद् युधि योद्धा धनुर्धर:।
भविता वा पुमान् कश्चिन्मत्समो वा गदाधर:॥ ६२॥
अनुवाद
'युद्ध में न तो अर्जुन के समान धनुर्धर है, न मेरे समान गदाधारी योद्धा है, और न ही किसी के आगे होने की कोई सम्भावना है ॥62॥
'In battle, there is neither an archer like Arjun nor a warrior with a mace like me, nor is there any possibility of one being ahead. 62॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×