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mahabharat 3.33.6: गाण्डीवधारी अर्जुन द्वारा रक्षित हमारा राज्य इन्द्र भी नहीं छीन सका, परन्तु तुम्हारी असावधानी के कारण वह हमारे सामने ही छीन लिया गया॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.33.6 
भवतोऽनवधानेन राज्यं न: पश्यतां हृतम्।
अहार्यमपि शक्रेण गुप्तं गाण्डीवधन्वना॥ ६॥
 
 
अनुवाद
गाण्डीवधारी अर्जुन द्वारा रक्षित हमारा राज्य इन्द्र भी नहीं छीन सका, परन्तु तुम्हारी असावधानी के कारण वह हमारे सामने ही छीन लिया गया॥6॥
 
'Even Indra could not snatch away our kingdom which was protected by Gandiva-wielding Arjun. But due to your carelessness it was snatched away in front of us.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)