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श्लोक 3.33.6  |
भवतोऽनवधानेन राज्यं न: पश्यतां हृतम्।
अहार्यमपि शक्रेण गुप्तं गाण्डीवधन्वना॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| गाण्डीवधारी अर्जुन द्वारा रक्षित हमारा राज्य इन्द्र भी नहीं छीन सका, परन्तु तुम्हारी असावधानी के कारण वह हमारे सामने ही छीन लिया गया॥6॥ |
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| 'Even Indra could not snatch away our kingdom which was protected by Gandiva-wielding Arjun. But due to your carelessness it was snatched away in front of us.॥ 6॥ |
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