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mahabharat 3.33.58: महाराज! आज तक कोई भी राजा जो केवल धर्मपरायण था, न तो पृथ्वी पर विजय प्राप्त कर सका है और न ही उसने धन और ऐश्वर्य प्राप्त किया है॥ 58॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.33.58 
न हि केवलधर्मात्मा पृथिवीं जातु कश्चन।
पार्थिवो व्यजयद् राजन्न भूतिं न पुन: श्रियम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आज तक कोई भी राजा जो केवल धर्मपरायण था, न तो पृथ्वी पर विजय प्राप्त कर सका है और न ही उसने धन और ऐश्वर्य प्राप्त किया है॥ 58॥
 
‘Maharaj! Till date no king who devoted himself only to Dharma has ever conquered the Earth nor has he attained wealth and prosperity.॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)