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प्रजापालनसम्भूतं फलं तव न गर्हितम्।
एष ते विहितो राजन् धात्रा धर्म: सनातन:॥ ५५॥
अनुवाद
राज्य प्राप्त होने पर प्रजा की रक्षा करने का पुण्य तुम्हारे द्वारा नष्ट नहीं होगा। महाराज! विधाता ने आप जैसे क्षत्रियों के लिए इसे सनातन धर्म बताया है॥ 55॥
‘When you acquire the kingdom, the merits of protecting your subjects will not be disgraced by you. Maharaj! The Creator has ordained this as the eternal Dharma for Kshatriyas like you.॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥