भैक्ष्यचर्या न विहिता न च विट्शूद्रजीविका।
क्षत्रियस्य विशेषेण धर्मस्तु बलमौरसम्॥ ५१॥
अनुवाद
क्षत्रिय के लिए न तो भिक्षा मांगना नियम है और न वैश्य या शूद्र के समान जीविका कमाना ही धर्म है। उसके लिए बल और उत्साह ही विशेष धर्म हैं॥ 51॥
‘For a Kshatriya, neither begging is the rule nor earning a livelihood like a Vaishya or Shudra. For him, strength and enthusiasm are the special religion.॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥