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श्लोक 3.33.42  |
धर्मं चार्थं च कामं च यथावद् वदतां वर।
विभज्य काले कालज्ञ: सर्वान् सेवेत पण्डित:॥ ४२॥ |
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| अनुवाद |
| हे वक्ताओं में श्रेष्ठ! समय को जानने वाला विद्वान पुरुष धर्म, अर्थ और काम का उचित प्रकार से विभाग करके उचित समय पर उन सबका उपभोग करे ॥ 42॥ |
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| 'The best among speakers! A learned man having knowledge of the right time should divide Dharma, Artha and Kama (desire) in the right manner and consume them all at the right time. ॥ 42॥ |
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