Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.33.31: हे राजन! धन की इच्छा करने वाला पुरुष महान पुण्य की इच्छा करता है और काम की इच्छा करने वाला पुरुष धन की इच्छा करता है। जैसे वह पुण्य से धन की और धन से काम की इच्छा करता है, वैसे ही वह काम के अतिरिक्त अन्य किसी वस्तु की इच्छा नहीं करता॥31॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.33.31 
अर्थार्थी पुरुषो राजन् बृहन्तं धर्ममिच्छति।
अर्थमिच्छति कामार्थी न कामादन्यमिच्छति॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! धन की इच्छा करने वाला पुरुष महान पुण्य की इच्छा करता है और काम की इच्छा करने वाला पुरुष धन की इच्छा करता है। जैसे वह पुण्य से धन की और धन से काम की इच्छा करता है, वैसे ही वह काम के अतिरिक्त अन्य किसी वस्तु की इच्छा नहीं करता॥31॥
 
‘O King! A man who desires wealth desires great virtue and a man who desires lust desires wealth. Just as he desires wealth from virtue and lust from wealth, in the same way he does not desire anything other than lust.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)