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mahabharat 3.33.12: ‘श्रीकृष्ण, अर्जुन, अभिमन्यु, संजयवंश के शूरवीर, मैं तथा ये नकुल और सहदेव - इनमें से किसी को भी यह वन-जीवन प्रिय नहीं है।॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 33: भीमसेनका पुरुषार्थकी प्रशंसा करना और युधिष्ठिरको उत्तेजित करते हुए क्षत्रिय-धर्मके अनुसार युद्ध छेड़नेका अनुरोध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.33.12 
यां न कृष्णो न बीभत्सुर्नाभिमन्युर्न सृंजया:।
न चाहमभिनन्दामि न च माद्रीसुतावुभौ॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘श्रीकृष्ण, अर्जुन, अभिमन्यु, संजयवंश के शूरवीर, मैं तथा ये नकुल और सहदेव - इनमें से किसी को भी यह वन-जीवन प्रिय नहीं है।॥12॥
 
‘Sri Krishna, Arjun, Abhimanyu, the brave men of Sanjaya dynasty, I and these Nakula and Sahadeva - none of them like this forest life.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)