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mahabharat 3.32.7: जैसे यह बगुला जल के पास बैठकर (मछलियों के लिए) ध्यान कर रहा है, वैसे ही ये सभी प्राणी अपने-अपने प्रयत्नों का आश्रय लेकर जीवित रहते हैं। सृष्टिकर्ता और विधाता भी सृष्टि के पालन के प्रयत्नों में निरन्तर लगे रहते हैं॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.32.7 
सर्वे हि स्वं समुत्थानमुपजीवन्ति जन्तव:।
अपि धाता विधाता च यथायमुदके बक:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जैसे यह बगुला जल के पास बैठकर (मछलियों के लिए) ध्यान कर रहा है, वैसे ही ये सभी प्राणी अपने-अपने प्रयत्नों का आश्रय लेकर जीवित रहते हैं। सृष्टिकर्ता और विधाता भी सृष्टि के पालन के प्रयत्नों में निरन्तर लगे रहते हैं॥7॥
 
Just like this heron sitting near water and meditating (for fish), all these creatures survive by resorting to their own efforts. The creator and the creator are also always engaged in the efforts of maintaining the universe. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)