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mahabharat 3.32.6: हे भारत! सभी प्राणी अपनी-अपनी गति को जानते हैं और अपने कर्मों का प्रत्यक्ष फल भोगते हैं, जिसे समस्त जगत देखता है॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.32.6 
उत्थानमभिजानन्ति सर्वभूतानि भारत।
प्रत्यक्षं फलमश्नन्ति कर्मणां लोकसाक्षिकम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! सभी प्राणी अपनी-अपनी गति को जानते हैं और अपने कर्मों का प्रत्यक्ष फल भोगते हैं, जिसे समस्त जगत देखता है॥6॥
 
Bharat! All beings understand their own progress and enjoy the direct fruits of their actions, which the entire world is witness to.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)