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mahabharat 3.32.59: भारत! इसी प्रकार लोग अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करते हैं - यही सफलता की प्रणाली है। काल और परिस्थिति के अनुसार शत्रु की दुर्बलता जानने का प्रयास ही सफलता का मूल कारण है। 59.   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  3.32.59 
एवं संस्थितिका सिद्धिरियं लोकस्य भारत।
तत्र सिद्धिर्गति: प्रोक्ता कालावस्थाविभागत:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
भारत! इसी प्रकार लोग अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करते हैं - यही सफलता की प्रणाली है। काल और परिस्थिति के अनुसार शत्रु की दुर्बलता जानने का प्रयास ही सफलता का मूल कारण है। 59.
 
Bharat! This is how people achieve success in their tasks - this is the system of success. The effort to find out the weakness of the enemy according to the division of time and condition is the root cause of success. 59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)