Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.32.5: हे भारतश्रेष्ठ! प्राणियों में, विशेषकर मनुष्य, इस लोक और परलोक में केवल कर्म द्वारा ही जीविका कमाना चाहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.32.5 
जङ्गमेषु विशेषेण मनुष्या भरतर्षभ।
इच्छन्ति कर्मणा वृत्तिमवाप्तुं प्रेत्य चेह च॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! प्राणियों में, विशेषकर मनुष्य, इस लोक और परलोक में केवल कर्म द्वारा ही जीविका कमाना चाहते हैं।
 
Bharatshrestha! Among living beings, especially humans, they want to earn livelihood in this world and the next world only through work. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)