Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.32.46: कर्म करने के बाद अन्त में कर्ता को फल मिलता है, उसी से हम जान सकते हैं कि दूसरों के कर्म सफल हुए हैं या हमारे ॥46॥ | mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्येषां कर्म सफलमस्माकमपि वा पुन:।
विप्रकर्षेण बुध्येत कृतकर्मा यथाफलम्॥ ४६॥
अनुवाद
कर्म करने के बाद अन्त में कर्ता को फल मिलता है, उसी से हम जान सकते हैं कि दूसरों के कर्म सफल हुए हैं या हमारे ॥46॥
After performing the deeds, the doer receives results in the end, that is how we can know whether the deeds of others have been successful or ours. ॥ 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥