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mahabharat 3.32.45: अथवा यदि कार्य सिद्ध हो जाए तो वह आपके, भीमसेन और अर्जुन के लिए तथा नकुल और सहदेव के लिए भी विशेष गौरव की बात होगी ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.32.45 
अथवा सिद्धिरेव स्यादभिमानं तदेव ते।
वृकोदरस्य बीभत्सोर्भ्रात्रोश्च यमयोरपि॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
अथवा यदि कार्य सिद्ध हो जाए तो वह आपके, भीमसेन और अर्जुन के लिए तथा नकुल और सहदेव के लिए भी विशेष गौरव की बात होगी ॥45॥
 
Or if the work is accomplished, it will be a matter of special pride for you, Bhimsen and Arjun and also for Nakul and Sahadev. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)