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mahabharat 3.32.44: इस समय हमारे राज्य के हड़पने के रूप में एक महान विपत्ति हम पर आ पड़ी है। यदि तुम यत्नपूर्वक कर्म में लग जाओ, तो निश्चय ही यह विपत्ति टल सकती है ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.32.44 
एकान्तेन ह्यनर्थोऽयं वर्ततेऽस्मासु साम्प्रतम्।
स तु नि:संशयं न स्यात् त्वयि कर्मण्यवस्थिते॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
इस समय हमारे राज्य के हड़पने के रूप में एक महान विपत्ति हम पर आ पड़ी है। यदि तुम यत्नपूर्वक कर्म में लग जाओ, तो निश्चय ही यह विपत्ति टल सकती है ॥ 44॥
 
At this time a great calamity in the form of usurpation of our kingdom has befallen us. If you engage yourself diligently in action, then certainly this calamity can be averted. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)