Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.32.40: (इसलिए मैं यह कह रहा हूँ) महाराज युधिष्ठिर! जो मनुष्य अपने कर्तव्य का पालन करता है, उसे प्रायः यहीं फल मिलता है। किन्तु जो मनुष्य आलसी है और अपने कर्तव्य का पालन ठीक से नहीं कर पाता, उसे कभी फल नहीं मिलता ॥40॥ | mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुर्वतो हि भवत्येव प्रायेणेह युधिष्ठिर।
एकान्तफलसिद्धिं तु न विन्दत्यलस: क्वचित्॥ ४०॥
अनुवाद
(इसलिए मैं यह कह रहा हूँ) महाराज युधिष्ठिर! जो मनुष्य अपने कर्तव्य का पालन करता है, उसे प्रायः यहीं फल मिलता है। किन्तु जो मनुष्य आलसी है और अपने कर्तव्य का पालन ठीक से नहीं कर पाता, उसे कभी फल नहीं मिलता ॥40॥
(Therefore I am saying this) Maharaj Yudhishthira! A person who performs his duties usually gets the result here. But a person who is lazy and is not able to perform his duties properly, never gets the result. ॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥