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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना
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श्लोक 39
श्लोक
3.32.39
कर्तव्यमेव कर्मेति मनोरेष विनिश्चय:।
एकान्तेन ह्यनीहोऽयं पराभवति पूरुष:॥ ३९॥
अनुवाद
परंतु मनु का सिद्धांत है कि मनुष्य को कर्तव्य करना ही चाहिए; जो व्यक्ति कर्तव्य को सर्वथा त्यागकर निश्चल बैठ जाता है, वह पराजय को प्राप्त होता है ॥39॥
But Manu's principle is that one must perform duty; the person who completely abandons duty and sits motionless, achieves defeat. ॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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