श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.32.37 
यं यमर्थमभिप्रेप्सु: कुरुते कर्म पूरुष:।
तत्तत् सफलमेव स्याद् यदि न स्यात् पुरा कृतम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
यदि पूर्व प्रारब्ध प्रभावी न होता तो मनुष्य जो भी प्रयोजन करता, वह सफल हो जाता ॥37॥
 
Had the previous destiny not been effective, then whatever purpose a man used to perform, it would have been successful. ॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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