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mahabharat 3.32.33: अन्य लोग मानते हैं कि मनुष्य के प्रयत्न की कोई आवश्यकता नहीं है। अदृश्य भाग्य और हठ ही सभी कार्यों के पीछे दो कारण हैं ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.32.33 
न चैवैतावता कार्यं मन्यन्त इति चापरे।
अस्ति सर्वमदृश्यं तु दिष्टं चैव तथा हठ:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अन्य लोग मानते हैं कि मनुष्य के प्रयत्न की कोई आवश्यकता नहीं है। अदृश्य भाग्य और हठ ही सभी कार्यों के पीछे दो कारण हैं ॥33॥
 
Other people believe that there is no need for human effort. Invisible destiny and stubbornness are the two reasons behind all actions. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)