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श्लोक 3.32.29  |
कुशलेन कृतं कर्म कर्त्रा साधु स्वनुष्ठितम्।
इदं त्वकुशलेनेति विशेषादुपलभ्यते॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| योग्य कर्ता द्वारा किया गया कार्य अच्छी तरह सम्पन्न होता है। यदि अयोग्य कर्ता द्वारा किया गया कार्य भी अच्छा होता है, तो वह कार्य के गुण से अर्थात् उसके फल से जाना जा सकता है।॥29॥ |
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| The work done by a capable doer is accomplished well. If the work is done by an unworthy doer, it can be known from the characteristic of the work i.e., from its result.॥ 29॥ |
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