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mahabharat 3.32.26-27: हे पुरुषोत्तम! कर्मों की गणना नहीं की जा सकती। घर और नगर आदि की प्राप्ति का कारण पुरुष ही है। विद्वान पुरुष को चाहिए कि पहले बुद्धि से यह निश्चय कर ले कि तिलों में तेल है, गाय में दूध है और लकड़ी में अग्नि है, फिर उसकी प्राप्ति के साधन का निश्चय कर ले। 26-27॥   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  3.32.26-27 
संख्यातुं नैव शक्यानि कर्माणि पुरुषर्षभ।
अगारनगराणां हि सिद्धि: पुरुषहैतुकी॥ २६॥
तिले तैलं गवि क्षीरं काष्ठे पावकमन्तत:।
धिया धीरो विजानीयादुपायं चास्य सिद्धये॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! कर्मों की गणना नहीं की जा सकती। घर और नगर आदि की प्राप्ति का कारण पुरुष ही है। विद्वान पुरुष को चाहिए कि पहले बुद्धि से यह निश्चय कर ले कि तिलों में तेल है, गाय में दूध है और लकड़ी में अग्नि है, फिर उसकी प्राप्ति के साधन का निश्चय कर ले। 26-27॥
 
Male best! Karmas cannot be calculated. Men are the reason behind the attainment of home and city etc. A learned man should first decide through his intellect that there is oil in the sesame seeds, milk in the cow and fire in the wood, and then decide on the means to achieve it. 26-27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)