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mahabharat 3.32.25: परन्तु हे वीर! मनुष्य मन में इच्छित वस्तुओं का निश्चय करके स्वयं ही बुद्धिपूर्वक कर्म द्वारा उन्हें प्राप्त करता है। अतः मनुष्य स्वयं ही उसका कारण है। 25.   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.32.25 
मनसार्थान् विनिश्चित्य पश्चात् प्राप्नोति कर्मणा।
बुद्धिपूर्वं स्वयं वीर पुरुषस्तत्र कारणम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु हे वीर! मनुष्य मन में इच्छित वस्तुओं का निश्चय करके स्वयं ही बुद्धिपूर्वक कर्म द्वारा उन्हें प्राप्त करता है। अतः मनुष्य स्वयं ही उसका कारण है। 25.
 
But brave one! After deciding the desired things in the mind, man himself intelligently achieves them through action. Hence man himself is the cause in it. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)