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mahabharat 3.32.16: इस संसार में जिस किसी को भी अचानक कहीं से धन प्राप्त हो जाता है, लोग उसे संयोगवश प्राप्त हुआ हुआ मानते हैं, क्योंकि ऐसा प्रतीत नहीं होता कि इसके लिए किसी ने कोई प्रयास किया है।   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.32.16 
अकस्मादिह य: कश्चिदर्थं प्राप्नोति पूरुष:।
तं हठेनेति मन्यन्ते स हि यत्नो न कस्यचित्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में जिस किसी को भी अचानक कहीं से धन प्राप्त हो जाता है, लोग उसे संयोगवश प्राप्त हुआ हुआ मानते हैं, क्योंकि ऐसा प्रतीत नहीं होता कि इसके लिए किसी ने कोई प्रयास किया है।
 
Whoever suddenly gets wealth from somewhere in this world, people consider him to have got it by chance, because it does not appear that anyone has made any effort for it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)