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mahabharat 3.32.15: इसी प्रकार जो हठी और मूर्ख मनुष्य कर्तव्य पालन करने में समर्थ होते हुए भी उन्हें नहीं करता और केवल निष्क्रिय बैठा रहता है, वह दुर्बल और अनाथ व्यक्ति के समान अधिक समय तक जीवित नहीं रहता ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.32.15 
तथैव हठदुर्बुद्धि: शक्त: कर्मण्यकर्मकृत्।
आसीत न चिरं जीवेदनाथ इव दुर्बल:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जो हठी और मूर्ख मनुष्य कर्तव्य पालन करने में समर्थ होते हुए भी उन्हें नहीं करता और केवल निष्क्रिय बैठा रहता है, वह दुर्बल और अनाथ व्यक्ति के समान अधिक समय तक जीवित नहीं रहता ॥15॥
 
Similarly, a stubborn and foolish person who, despite being capable of performing duties, does not perform them and just sits idle, does not live long like a weak and orphan person. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)