Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.32.1: द्रौपदी बोली - हे कुन्तीपुत्र! मैं किसी भी प्रकार से धर्म की अवहेलना या निन्दा नहीं कर सकती। फिर मैं उन परमेश्वर की अवहेलना कैसे कर सकती हूँ जो समस्त प्रजा का पालन करते हैं?॥1॥ | mahabharat अध्याय 3.32: द्रौपदीका पुरुषार्थको प्रधान मानकर पुरुषार्थ करनेके लिये जोर देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रौपद्युवाच
नावमन्ये न गर्हे च धर्मं पार्थ कथंचन।
ईश्वरं कुत एवाहमवमंस्ये प्रजापतिम्॥ १॥
अनुवाद
द्रौपदी बोली - हे कुन्तीपुत्र! मैं किसी भी प्रकार से धर्म की अवहेलना या निन्दा नहीं कर सकती। फिर मैं उन परमेश्वर की अवहेलना कैसे कर सकती हूँ जो समस्त प्रजा का पालन करते हैं?॥1॥
Draupadi said - O son of Kunti! I cannot disregard or criticise Dharma in any way. Then how can I disregard the Supreme Lord who takes care of all the subjects?॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥