श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 315: अज्ञातवासके लिये अनुमति लेते समय शोकाकुल हुए युधिष्ठिरको महर्षि धौम्यका समझाना, भीमसेनका उत्साह देना तथा आश्रमसे दूर जाकर पाण्डवोंका परस्पर परामर्शके लिये बैठना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  3.315.6-7 
तद् वसामो वयं छन्नास्तदनुज्ञातुमर्हथ।
सुयोधनश्च दुष्टात्मा कर्णश्च सहसौबल:॥ ६॥
जानन्तो विषमं कुर्युरस्मास्वत्यन्तवैरिण:।
युक्तचाराश्च युक्ताश्च पौरस्य स्वजनस्य च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अतः इस वर्ष हम छिपकर रहना चाहते हैं। कृपया हमें इसकी अनुमति दीजिए। दुष्ट दुर्योधन, कर्ण और शकुनि हमसे अत्यंत द्वेष रखते हैं। वे स्वयं हमारा पता लगाने पर तुले हुए हैं और उन्होंने गुप्तचर भी तैनात कर रखे हैं। अतः यदि उन्हें हमारे यहाँ रहने का पता चल गया, तो वे हमारे सगे-संबंधियों और परिवारजनों के साथ भी दुर्व्यवहार कर सकते हैं।॥6-7॥
 
‘Therefore, this year we want to live in hiding. Please give us permission for this. The evil-minded Duryodhan, Karna and Shakuni hate us very much. They themselves are determined to find our whereabouts and they have also deployed spies. Therefore, if they come to know about our stay, they can misbehave with our relatives and family members too.॥ 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)