श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 315: अज्ञातवासके लिये अनुमति लेते समय शोकाकुल हुए युधिष्ठिरको महर्षि धौम्यका समझाना, भीमसेनका उत्साह देना तथा आश्रमसे दूर जाकर पाण्डवोंका परस्पर परामर्शके लिये बैठना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.315.26 
न वयं तत् प्रहास्यामो यस्मिन् योक्ष्यति नो भवान्।
भवान् विधत्तां तत् सर्वं क्षिप्रं जेष्यामहे रिपून्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
आप हमें जो भी कार्य सौंपेंगे, हम उसे पूरा किए बिना नहीं छोड़ेंगे। अतः आप युद्ध की पूरी तैयारी कीजिए। हम शीघ्र ही शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर लेंगे।॥26॥
 
‘Whatever work you assign us, we will not leave it without completing it. Therefore, you make all the arrangements for the war. We will soon conquer the enemies.’॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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