vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 315: अज्ञातवासके लिये अनुमति लेते समय शोकाकुल हुए युधिष्ठिरको महर्षि धौम्यका समझाना, भीमसेनका उत्साह देना तथा आश्रमसे दूर जाकर पाण्डवोंका परस्पर परामर्शके लिये बैठना
»
श्लोक 25
श्लोक
3.315.25
सहदेवो मया नित्यं नकुलश्च निवारितौ।
शक्तौ विध्वंसने तेषां शत्रूणां भीमविक्रमौ॥ २५॥
अनुवाद
महापराक्रमी नकुल और सहदेव उन समस्त शत्रुओं का नाश करने में समर्थ हैं। मैं ही उन्हें सदैव रोकता आया हूँ॥ 25॥
The fiercely valiant Nakula and Sahadeva are capable of destroying all those enemies. I am the one who has always stopped them.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×