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श्लोक 3.315.21  |
एवमेव महात्मान: प्रच्छन्नास्तत्र तत्र ह।
अजयञ्छात्रवान् युद्धे तथा त्वमपि जेष्यसि॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| ‘जिस प्रकार अनेक महापराक्रमी पुरुषों ने युद्ध में इधर-उधर छिपकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त की है, उसी प्रकार तुम भी विजयी होगे।’॥21॥ |
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| ‘Similarly, many great and brave men have conquered their enemies in war by hiding here and there. In the same way, you too will be victorious.’॥ 21॥ |
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