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श्लोक 3.315.16  |
हुताशनेन यच्चाप: प्रविश्यच्छन्नमासता।
विबुधानां कृतं कर्म तच्च सर्वं श्रुतं त्वया॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| अग्निदेव ने जल में प्रवेश करके और वहाँ छिपे रहकर किस प्रकार देवताओं का कार्य सम्पन्न किया, यह तो आप सुन ही चुके हैं॥16॥ |
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| You have already heard how Agni accomplished the task of the gods by entering the water and remaining hidden there.॥ 16॥ |
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