vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 315: अज्ञातवासके लिये अनुमति लेते समय शोकाकुल हुए युधिष्ठिरको महर्षि धौम्यका समझाना, भीमसेनका उत्साह देना तथा आश्रमसे दूर जाकर पाण्डवोंका परस्पर परामर्शके लिये बैठना
»
श्लोक 16
श्लोक
3.315.16
हुताशनेन यच्चाप: प्रविश्यच्छन्नमासता।
विबुधानां कृतं कर्म तच्च सर्वं श्रुतं त्वया॥ १६॥
अनुवाद
अग्निदेव ने जल में प्रवेश करके और वहाँ छिपे रहकर किस प्रकार देवताओं का कार्य सम्पन्न किया, यह तो आप सुन ही चुके हैं॥16॥
You have already heard how Agni accomplished the task of the gods by entering the water and remaining hidden there.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×