श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.314.23 
युधिष्ठिर उवाच
देवदेवो मया दृष्टो भवान् साक्षात् सनातन:।
यं ददासि वरं तुष्टस्तं ग्रहीष्याम्यहं पित:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "पिताजी! आप सनातन परमेश्वर हैं। आज मैंने आपके साक्षात दर्शन किये हैं। आप प्रसन्न होकर मुझे जो भी वरदान देंगे, मैं उसे स्वीकार करूँगा।"
 
Yudhishthira said, "Father! You are the eternal God. Today I have seen you in person. Whatever boon you give me out of pleasure, I will accept it."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas