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mahabharat 3.314.22: ‘पुत्र! तुम तीसरा वर भी मांग सकते हो, जो महान् और अतुलनीय है। राजन! तुम मेरे पुत्र हो और विदुर भी मेरे अंश से उत्पन्न हुए हैं।’॥22॥   |   mahabharat अध्याय 3.314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.314.22 
तृतीयं गृह्यतां पुत्र वरमप्रतिमं महत्।
त्वं हि मत्प्रभवो राजन् विदुरश्च ममांशज:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्र! तुम तीसरा वर भी मांग सकते हो, जो महान् और अतुलनीय है। राजन! तुम मेरे पुत्र हो और विदुर भी मेरे अंश से उत्पन्न हुए हैं।’॥22॥
 
‘Son! You can ask for the third boon which is also great and incomparable. King! You are my son and Vidur has also taken birth from my part.’॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)