श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.314.2 
युधिष्ठिर उवाच
सरस्येकेन पादेन तिष्ठन्तमपराजितम्।
पृच्छामि को भवान् देवो न मे यक्षो मतो भवान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "मैं आपसे पूछता हूँ कि देवताओं में सबसे बड़ा कौन है और इस झील में एक पैर पर खड़ा होकर कौन अपराजित है? आप मुझे यक्ष नहीं लगते।"
 
Yudhishthira said, "I ask you, who is the greatest of gods and who is undefeated in this lake, standing on one leg? You do not appear to me to be a Yaksha."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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