श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.314.19 
यद् व: संकल्पितं रूपं मनसा यस्य यादृशम्।
तादृशं तादृशं सर्वे छन्दतो धारयिष्यथ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘और तुममें से जो कोई जिस प्रकार चाहे संकल्प करेगा, वह अपनी इच्छानुसार उस रूप को धारण कर सकेगा।॥19॥
 
‘And whoever amongst you makes a resolution in whatever way he wishes, he will be able to assume that form according to his wish.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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