श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.314.15 
युधिष्ठिर उवाच
वर्षाणि द्वादशारण्ये त्रयोदशमुपस्थितम्।
तत्र नो नाभिजानीयुर्वसतो मनुजा: क्वचित्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हम बारह वर्ष वन में रहे हैं। अब तेरहवाँ वर्ष आरम्भ हो गया है। अतः आप हमें ऐसा वर दीजिए कि हम जहाँ भी रहें, लोग हमें पहचान न सकें।" ॥15॥
 
Yudhishthira said, "We have lived in the forest for twelve years. Now the thirteenth year has begun. So please grant us a boon that wherever we live, people cannot recognize us." ॥15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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