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mahabharat 3.314.14: वैशम्पायन कहते हैं - इसके बाद भगवान धर्म ने उत्तर दिया कि (ले लो, मैं तुम्हें अरणी और मथानी दे रहा हूँ। हे देवतुल्य राजन! तुम्हारा कल्याण हो, अब कोई अन्य वर मांग लो।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.314.14 
वैशम्पायन उवाच
ददानीत्येव भगवानुत्तरं प्रत्यपद्यत।
अन्यं वरय भद्रं ते वरं त्वममरोपम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - इसके बाद भगवान धर्म ने उत्तर दिया कि (ले लो, मैं तुम्हें अरणी और मथानी दे रहा हूँ। हे देवतुल्य राजन! तुम्हारा कल्याण हो, अब कोई अन्य वर मांग लो।॥14॥
 
Vaishmpayana says - After this, Lord Dharma replied that (take it, I am giving you the Arani and the churning wood. O king, who is like a god! May you be blessed, now ask for any other boon. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)