Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.314.13: यक्ष ने कहा - हे कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर! आपकी परीक्षा लेने के लिए मैं स्वयं मृग का रूप धारण करके ब्राह्मण की लकड़ी सहित मथानी छीनकर भाग गया था।   |   mahabharat अध्याय 3.314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.314.13 
यक्ष उवाच
अरणीसहितं ह्यस्य ब्राह्मणस्य हृतं मया।
मृगवेषेण कौन्तेय जिज्ञासार्थं तव प्रभो॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने कहा - हे कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर! आपकी परीक्षा लेने के लिए मैं स्वयं मृग का रूप धारण करके ब्राह्मण की लकड़ी सहित मथानी छीनकर भाग गया था।
 
The Yaksha said - O son of Kunti, King Yudhishthira! To test you, I myself had taken away the churning stick along with the Brahmin's firewood in the form of a deer and ran away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)