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mahabharat 3.314.11: हे निष्पाप राजा! अपनी इच्छानुसार वर मांगो। मैं तुम्हें अवश्य दूँगा। जो मनुष्य मेरे भक्त हैं, वे कभी दुर्भाग्य में नहीं पड़ते॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 3.314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.314.11 
वरं वृणीष्व राजेन्द्र दाता ह्यस्मि तवानघ।
ये हि मे पुरुषा भक्ता न तेषामस्ति दुर्गति:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप राजा! अपनी इच्छानुसार वर मांगो। मैं तुम्हें अवश्य दूँगा। जो मनुष्य मेरे भक्त हैं, वे कभी दुर्भाग्य में नहीं पड़ते॥ 11॥
 
O sinless king! Ask for a boon of your choice. I will surely give it to you. Those men who are my devotees never meet with misfortune.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)