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mahabharat 3.314.10: आपका कल्याण हो। मैं धर्म हूँ और आपका आचरण जानने के लिए यहाँ आया हूँ। हे निष्पाप राजा! मैं आपकी दयालुता और निष्पक्षता से प्रसन्न हूँ और आपको वर देना चाहता हूँ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 314: यक्षका चारों भाइयोंको जिलाकर धर्मके रूपमें प्रकट हो युधिष्ठिरको वरदान देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.314.10 
धर्मोऽहमिति भद्रं ते जिज्ञासुस्त्वामिहागत:।
आनृशंस्येन तुष्टोऽस्मि वरं दास्यामि तेऽनघ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
आपका कल्याण हो। मैं धर्म हूँ और आपका आचरण जानने के लिए यहाँ आया हूँ। हे निष्पाप राजा! मैं आपकी दयालुता और निष्पक्षता से प्रसन्न हूँ और आपको वर देना चाहता हूँ॥10॥
 
May you be blessed. I am Dharma and I have come here to know your behaviour. Sinless King! I am pleased with your kindness and impartiality and I want to grant you a boon.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)