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mahabharat 3.313.d1: जो भूत, वर्तमान और भविष्य की सभी वस्तुओं से मुक्त है, शान्त, प्रसन्न है और सदैव योग में तत्पर है, वही समस्त सम्पत्तियों का स्वामी है।   |   mahabharat अध्याय 3.313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  3.313.d1 
(भूतभव्यभविष्येषु नि:स्पृह: शान्तमानस:।
सुप्रसन्न: सदा योगी स वै सर्वधनीश्वर:॥ )
 
 
अनुवाद
जो भूत, वर्तमान और भविष्य की सभी वस्तुओं से मुक्त है, शान्त, प्रसन्न है और सदैव योग में तत्पर है, वही समस्त सम्पत्तियों का स्वामी है।
 
He who is free from attachment to all things past, present and future, peaceful, happy and always engaged in yoga, is the master of all wealth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)