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श्लोक 3.313.99  |
यक्ष उवाच
कोऽहङ्कार इति प्रोक्त: कश्च दम्भ: प्रकीर्तित:।
किं तद् दैवं परं प्रोक्तं किं तत् पैशुन्यमुच्यते॥ ९९॥ |
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| अनुवाद |
| यक्ष ने पूछा - अहंकार क्या है? अहंकार किसे कहते हैं? वह क्या है जिसे परब्रह्म कहते हैं? और पैशुन्य किसे कहते हैं?॥99॥ |
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| Yaksha asked - What is ego? What is called arrogance? What is that which is called supreme god? And what is called Paishunya?॥99॥ |
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