श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  3.313.99 
यक्ष उवाच
कोऽहङ्कार इति प्रोक्त: कश्च दम्भ: प्रकीर्तित:।
किं तद् दैवं परं प्रोक्तं किं तत् पैशुन्यमुच्यते॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
यक्ष ने पूछा - अहंकार क्या है? अहंकार किसे कहते हैं? वह क्या है जिसे परब्रह्म कहते हैं? और पैशुन्य किसे कहते हैं?॥99॥
 
Yaksha asked - What is ego? What is called arrogance? What is that which is called supreme god? And what is called Paishunya?॥99॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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