श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 313: यक्ष और युधिष्ठिरका प्रश्नोत्तर तथा युधिष्ठिरके उत्तरसे संतुष्ट हुए यक्षका चारों भाइयोंके जीवित होनेका वरदान देना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  3.313.98 
युधिष्ठिर उवाच
धर्मज्ञ: पण्डितो ज्ञेयो नास्तिको मूर्ख उच्यते।
काम: संसारहेतुश्च हृत्तापो मत्सर: स्मृत:॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "जो व्यक्ति धर्म को जानता है, उसे विद्वान समझना चाहिए। मूर्ख को नास्तिक और नास्तिक को मूर्ख कहा जाता है। इस जन्म-मरण के चक्र का कारण कामना है और हृदय में जलन ईर्ष्या है।" 98
 
Yudhishthira said, "A person who knows the Dharma should be considered a learned person. A fool is called an atheist and an atheist is a fool. The cause of this cycle of birth and death is desire and the burning sensation in the heart is envy." 98
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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