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श्लोक 3.313.97  |
यक्ष उवाच
क: पण्डित: पुमान् ज्ञेयो नास्तिक: कश्च उच्यते।
को मूर्ख: कश्च काम: स्यात् को मत्सर इति स्मृत:॥ ९७॥ |
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| अनुवाद |
| यक्ष ने पूछा - किस पुरुष को विद्वान माना जाए ? नास्तिक किसे कहते हैं ? मूर्ख किसे कहते हैं ? काम किसे कहते हैं ? और ईर्ष्या किसे कहते हैं ?॥97॥ |
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| The Yaksha asked - Which man should be considered a learned man? Who is called an atheist? Who is a fool? What is lust? And what is called jealousy?॥97॥ |
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